यार उसके पास तो वक़्त ही नहीं

मेरी व्यस्तता का आलम ये तो नहीं,

कि नकार दिया मैंने वक़्त बिताने को तेरे साथ,

तुझसे जो कह दिया हो, यार अभी नहीं और कभी सही…

ना मनाही की ना नकारा, फिर भी न जाने क्यों कहता है मन ये तेरा,

भूल गया वो यारी अमीरी में,

यार उसके पास वक़्त ही नहीं।

 

लगती बात थोड़ी अजीब है अपनी अजीजी में,

कुछ न रखा यारी की गरीबी में, रईसी माकूल होती है यारी में और तू कहता हैं,

यार उसके पास वक़्त ही नही।

 

डोर याद हैं बनी कैसी थी यारी की… शायद जिक्र बयां से।

जिक्र की यार है वो मेरा, बयां की यार हैं वो मेरा…

आज इस डोर के छोरो की बयानबाजी तो देखो कहता है,

यार उसके पास वक़्त ही नहीं।

 

हो सकता है जिंदगी तेरी बहुत लज़ीज़ हो,

यारी की अजीजी से जिंदगी तरजीह हो…
क्या कहूँ खुशनसीब हूँ, डोर ने यारी की मंजिले मुकम्मल कर दी।
फिर भी कहता हूँ तेरी तरजीह पे,

मुश्किलात जो आये तरजीह में ये न कहना,

यार उसके पास तो वक़्त ही नहीं।

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