जानवी & अनिमेष – 1

हिन्दी| English

जानवी का आना अनिमेष के चेहरे पर मुस्कुराहट ले आया। अनिमेष ने कहा, “तुम फिर आ गयी।“

“हाँ, मेरा बर्थडे है मुझे तो आना ही था,” कहकर जानवी अनिमेष के बगल में बैठ गयी।

“इतनी दूर क्यों चली जाती हो, और जाती तो मत आया करो।” अनिमेष ने शिकायती लहजे में कहा।

“कुछ मजबूरियां होती है अनिमेष, खैर मैं तो आऊंगी, तुमने मोहब्बत की थी न।” जानवी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

और अनिमेष ने कहा “हाँ, मोहब्बत तो की थीं, पहली बार जब तुम्हें देखा था तब से।”

और जानवी के चेहरे पर खुशी का भाव झलका, उसने कहा, “सच्ची… मैं भी तो जानूँ ये कब और कैसे हुआ?”

अनिमेष ने रूखे सा होकर कहा, “हर साल इसी दिन तुम यही सवाल करती हो।”

जानवी ने लालायित ढंग से कहा, “ये दिन स्पेशल है, अच्छा लगता है।”

फिर क्या था अनिमेष को दोहराना ही पड़ा कैसे पहली नज़र में ही जानवी को वो अपना समझ चुका था।

“जानवी, तुम मेरी जिंदगी में आयी वो लड़की हो जिसके एहसास ने मुझे बदलने में कोई कमी नहीं छोड़ी।”

“फिर वही लाइन दोहराई तुमने।”

“सच कभी बदलता नहीं शायद इसलिए।” अनिमेष ने सहज होते हुए जानवी के सवाल का जवाब दिया।

“याद है तुम्हें मेरे कालेज का टेक-फेस्ट, तुम अपने दोस्तों के साथ आयी थी, मारिया ने बुलाया था न तुम्हें।”

नजर उठाकर जब जानवी को देखा तो वो गर्दन हिलाकर सहमति दे रही थी।
“उस दिन मेरी सबसे अच्छी दोस्त मारिया ने मुझ नौसिखिये को अपना कीमती कैमरा थमा दिया कि मैं फोटोज क्लिक करूँ। पता है कैमरा थमाकर उसने क्या कहा था?” और जानवी को निःशब्द देखकर उसने डांटने वाली आवाज़ में जारी रखा, “अनिमेष, ये पकड़ कैमरा और एक भी मोमेंट मिस किया न तो घुसे खायेगा।” और फिर अपनी आवाज़ में कहने लगा, “फिर क्या था, लगे हाथ मैंने भी फोटोग्राफी सीख ली। सच कहूँ तो किसी का हँसता-खिलखिलाता, मस्ती में सराबोर चेहरा मेरे हाथों में फोटो लेने का अंदाज़ दे गया। वो हँसता-खिलखिलाता, मस्ती में सराबोर चेहरा हर दफा कैमरे में कैद होता जा रहा था। कैमरामैन अनिमेष की हर एंगल में उस एक ही चेहरे को कैद करने की कोशिश हर मर्तबा जारी थी, पर नौसिखिये से क्या उम्मीद, कई तो नहीं कुछ ही फोटोज उस चेहरे का अक्स लिए थे। वो कोई और कोई नहीं तुम थी जानवी।”

“मतलब मैं पहली नज़र में ही तुम्हें पसंद आ गयी थी।”

“बिल्कुल।”

“फिर तुमने मुझे ढूंढा कैसे?”

अनिमेष हंसने लगा, “जब मारिया इधर-उधर हर जगह भटक चुकी थी, वो मेरे पास आयी और कैमरा छीन लिया और फोटो देखने लगी। हम कालेज की सीढ़ियों पर आजु-बाजु ही बैठ गये। हँसी तो रुक ही नहीं रही थी, इतनी बेकार फोटोज जो उसकी नज़रों के सामने आ रही थी। जब तुम्हारी फोटो उसने देखी तो उसने तुरंत कहा कि अरे ये जानवी की फोटो भी तुमने ले ली। तुम्हें पता है उस दिन तक बहुत सारी लड़कियों का पीछा कर चुका था, लेकिन कभी इतना खुशकिस्मत नहीं था कि इतने जल्दी किसी का नाम पता पड़ा था, पर तुम्हारा नाम तो यूँ ही पता चल गया।”

“तुम लड़के होते ही ऐसे हो लड़कियों का पीछा करते रहते हो बस।”

“अरे ऐसा भी नहीं है, कोई अच्छा लगता है तो उसे जानना तो पड़ेगा ही ना।”

“अच्छा ठीक है, चलो कुछ पूछती हूँ… बताओ उस दिन मैंने क्या पहना था।”

“हम्म, जीन्स, ब्लू टॉप, और कान में सुंदर बालियां, तुम बिल्कुल एक कश्मीरी लड़की लग रही थी।”

“बस-बस इतनी तारीफों की आदत नहीं है मुझे।”

“अच्छा, तो जब मुझे तुम्हारा नाम पता चला, मैंने मारिया से पूछा कि वो तुम्हें कैसे जानती है? मारिया ने बताया की तुम दोनों दोस्त हो, और अपने दोस्तों के साथ कालेज आयी हो। मैं तपाक से मारिया से बोला, कि मारिया, तूने अपनी दोस्त से मिलाया नहीं, वो तो ऐसे घूरने लगी जैसे खा जाएगी, बोलने लगी कि वो मेरी दोस्त हैं, मेरे से मिलेगी।”

“जानवी तुम तो जानती हो न मारिया कितनी बेवकूफ है, मैंने उससे तुम्हारा पूरा नाम बताने को कहा वो फट से बोल पड़ी जानवी शर्मा।” और दोनों हँसने लगे। हँसते-हँसते अनिमेष कहने लगा, “जब एहसास हुआ की उसने क्या गलती कर दी वो बोली कि देख तू उसको अब फेसबुक पर मत ढूँढना। और मैंने कहा, ‘मारिया, तू आईडिया अच्छे देती है।’ वो ऐसे घूरने लगी जैसे मैं उसका आईडिया कैंसिल कर दूंगा।”

हँसने का शोर बढ़ रहा था।

“मारिया बेशक बेवकूफ है, पर सबसे अच्छी दोस्त हैं, दोस्तों में बेवकूफ बने भी तो क्या? दो बेवकूफ ही तो अच्छी दोस्ती निभाते हैं, ऐसा मारिया अक्सर कहा करती है, जब भी मैं उसे बेवकूफ कहता हूँ। मैं उसी के सामने तुम्हारा प्रोफाइल सर्च करने लगा, तुम मिली भी पर अब भी कुछ दीवारें थी जो मारिया ही गिरा सकती थी। बार-बार बोलकर मारिया से मेरे मोबाइल पर उसका फेसबुक लॉगिन करवाया। मारिया मेरे बगल में मुंह फुला के बैठी रही और मैं तुम्हारा प्रोफाइल देखने लगा, तुमने काफी अच्छी बातें लिखी हुई थी।”

“अच्छा एक बात बताओ अनिमेष, मैं सच्ची पहली नज़र में तुम्हें अच्छी लगी मतलब ऐसे नहीं जैसे हर दूसरा लड़का किसी अच्छी लड़की को देखकर कहता है, मतलब की वो बोलते है ना कि पहली नजर में बस कोई अच्छा लग गया मतलब बस।”

“पता है जानवी एहसास हो जाना चाहिए कि जिस अजनबी लड़की को तुमने देखा और तुम्हें अच्छी लगी, उसको चाहते हो या नहीं। उसी शाम की बात है, कालेज से निकलते वक़्त, यूँ ही शायद, मारिया ने मुझसे पूछा था कि क्या मुझे जानवी पसंद आयी?”

“तुमने क्या कहा?”

“मैं तो था ही बेफिक्र, बेपरवाह, बोल दिया जो कब से मेरे दिल दिमाग में चल रहा था कि हाँ यार, प्यार वाली फीलिंग आ रही है। मैं मिन्नत कर रहा था मारिया से की वो हम दोनों कि बात करा दे। पर उसको तो जैसे हुक्म का काल गया,  खड़े-खड़े रंग बदल गए लड़की के, वो बोली, ‘देखती हूँ।’ और निकल पड़ी अपने रास्ते।”

“फिर क्या किया तुमने?”

“भागा उसके पीछे, और बोला कि तेरे बर्थडे पर जानवी को बुला ले। पिज़्ज़ा ही खिला देना।”

“और वो क्या बोली? उसने हाँ बोल दिया होगा।”

“तुम्हें ऐसा लगता है। वो कंजूस बिफर पड़ी कि न तो मैं जानवी को बुला रही हूँ, और न ही कोई पिज़्ज़ा खिला रही, चुपचाप कैंटीन में समोसा खा लेना।”

“मैंने आखिर में बोला कि बस एक बार बात करा दे बस, तू बर्थडे पर उसको घर बुला ले, मैं बस  टपक जाऊंगा। वो शायद सोच में थी, मैंने जारी रखा ‘क्या सोच रही है तेरे दोस्त की लाइफ बन जाएगी  तेरी वजह से।’ और उसने हँसकर कहा ‘चल ठीक हैं, पर तू ज्यादा टाइम पास नहीं करेगा और इरिटेट तो बिलकुल नहीं, मैं तुम दोनों को जानती हूँ।’ फिर हम अपने-अपने घर निकल पड़े।”

“फिर…”

Advertisements

One thought on “जानवी & अनिमेष – 1

Add yours

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Create a website or blog at WordPress.com

Up ↑

%d bloggers like this: