दोस्त, मुझे क्यों तुमसे नफरत होती हैं

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मेरे प्रिय मित्र, क्यों मैं तुमसे नफरत करता हुँ? तुम्हारे कर्मों के अंत मुझे निराश करते हैं,

तुम बगैर कारण दोस्ती को नजरअंदाज करना, मेरे शब्दों को तुम्हारा यूँ ही लिया जाना मुझे तनाव देता है,

… और फिर मैं तुम से नफरत करता हूँ|

जरा हमारी दोस्ती की शुरुआत को सोचो, निष्ठा के साथ यह पालन करने के वादे सोचो,

तुम ज़िंदगी के लिए महत्वपूर्ण हो, पर हमारे बिताये वक़्त आज जीवन के कुछ नहीं है|

मेरा तुम जैसा दोस्त है, यह मुझे परेशान करता है, जो तुम मुझे समर्थन देने के बजाय विरोध करते हो,

… और फिर मैं तुम से नफरत करता हूँ|

समझो! तुम मित्र के रूप में नाटक करते हो लेकिन बुराई भी,

मैं मजबूर होता हूँ भूल जाने में तुम्हारी हर समय परवाह की।

मैं चुप रहता हूं, मैं उत्तर नहीं देता, मैं अनदेखा करता हूं,

मेरी नफरत को समझने के लिए, क्या तुम समझो मुझे क्या लगता है?

समझो, यह नफरत करने के लिए जोड़ता है,

… और फिर मैं तुम से नफरत करता हूँ|

हमारा एक साथ समय  नकली दिखता है,और तुम मित्रता के लिए नहीं समझते हो,

मैं बस सोच से नफरत करता हूँ कि मुझे लगता है कि तुम अच्छे दोस्त नहीं हो,

फिर तुम्हारा दोहराना, मजबूर करता है कहने को  मैं तुमसे नफरत करता हूँ|

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