Earphones

एक साथ करीब एक घंटे का सफर तय करना था उन दोनो को, हर रोज की तरह|

हर रोज करने की बाते होती भी कितनी थी, जो भी रहती सुबह की हाय-हैलो मे सिमट जाती| बाकी के सफर मे वो दो से चार हो जाते – वो दोनो, और उनके इयरफोन्स|

आज भी कुछ ऐसा हो सकता था पर… पर हुआ यूँ कि आज दो से तीन ही हुए| वो तो अपना हमसफर लायी ही न थी| बातो का दौर आज भी हाय-हैलो मे सिमट चुका था, उनके कानो मे लगता-निकलता इयरफोन उनकी बातो का दायरा जो बढ़ा रहा है| पसंद और नापसंद के गानो के बीच एक चेहरे पर जलते-बुझते से भाव दुजे चेहरे पर बरबस ही मुस्कुराहट दिये जा रहे थे| सफर मे खामोशी थी, पर किन्ही के लबो के बीच गुनगुनाहट और किन्ही पर मुस्कुराहट|

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